| सुचित्रा शरण |
आज हम आपकी मुलाकात 0 एम 0 जे 0 एम 0 सी की छात्रा सुचित्रा शरण से करवाने जा रहे हैं जो हमारे क्लास की सबसे सीनियर हैं. आइये हम इनके अनुभव को आप लोगों के समक्ष रखने की कोशिश करता हूँ. ज्यादा से ज्यादा इनके परिवार और कैरियर में कैसे सामंजस्य बैठाती हैं शायद हरेक युवा छात्रा के लिए महत्वपूर्ण है.
प्रश्न - सबसे पहले आप यह बतायें कि आप इस फील्ड में कैसे आई?
उत्तर - मुझे लिखने का शौक काफी बचपन से रहा है. समाज में हो रही घटनाओं और दुर्घटनाओं को लिख कर लोगों के समक्ष रखने का एक अच्छा तरीका या माध्यम है जिसे मास लेविल पर लोग समझेंगे.
प्रश्न - इस फील्ड में आप कितने दिनों से हैं?
उत्तर - करीब - करीब 10 वर्षों से. मैंने इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिन्ट मीडिया दोनों में जाॅब किया पर प्रिन्ट मीडिया ज्यादा अच्छा लगता है.
प्रश्न - क्यों?
उत्तर - क्योंकि हम अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचा सकते हैं.
प्रश्न - जब आपके पास जाॅब है तो आपने यह कोर्स क्यों किया?
उत्तर - मुझे पढ़ने का बहुत शौक है. मैंने पहले भी यहां से मीडिया राइटिंग का कोर्स कर चुकी हूँ. मुझे अधूरा लग रहा था इसलिए मैंने यह कोर्स किया.
प्रश्न - आप कैसे परिवार और आफिस दोनों जगह मैनेज करती हैं?
उत्तर - बिल्कुल आसान काम है, क्योंकि काम चाहे कोई भी हो - कैसे करना है यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि किस तरीके से करना है यह महत्वपूर्ण हैं. मैंने एक बार इन्दिरा गाँधी के इन्टरव्यू को पढ़ा था कि मेरे बेटे संजय जब छोटे थे तो उनके दोस्त की माँ मिलने आयी और उन्होंने कहा कि हमारा हमेशा पुत्र संजय से आपकी तारीफ सुनता रहता है कि मेरी माँ काफी ज्यादा टाईम देती हैं जबकि मैं घर पर ही रहती हूँ तब भी ज्यादा टाईन नहीं दे पाती, यह आप कैसे कर पाती हैं? तो मिसेज गाँधी ने कहा कि बच्चों पर ज्यादा से ज्यादा समय देना महत्व नहीं है बल्कि जो भी समय दिया वह सही तरीके से दिया जाये यह महत्वपूर्ण है. और आॅफिस वाली महिला बच्चों की अच्छी परवरिश करती है. इसका उदाहरण मुख्यमंत्री शाीला दीक्षित, सुषमा स्वाज्य, इंदिरानूई, हेमामालिनी ये सब अपने फील्ड और परिवार दोनों को अच्छे ढंग से चलाती हैं और इनसे ही मुझे प्रेरणा मिलती है.
प्रश्न - जब आप पहली बार इस फील्ड में गयीं तो क्या - क्या दिक्कतें आयीं?
उत्तर - सबसे पहले तो नये होने के कारण पूछा जाता था कि कहीं काम किया है कि नहीं. अगर नहीं कहा तो सोंगे फिर कहेंगे कि जगह खाली नहीं है. मगर इस मामले में मैं लकी हूँ कि मेरी क्लासमेट हमेश सपोर्ट करते रहे हैं. दूरदर्शन पर भी मैं आवाम की आवाज और कल्याणी में रिसोर्स पर्सन पर काम कर चुकी हूँ. और कल्याणी में रह कर ही मैंने सोशल वर्क करना सीखा है.
प्रश्न - सोशल वर्क में आपने क्या - क्या किया है?
उत्तर - मैं अपना एनजीओ चलाती हूँ 7 जिसमें मेम्बर हैं जिसे जहां काम करना होता है और मैं अपने वेतन 2 से लड़कियों को शिक्षा दिलवाती हूँ जिससे मुझे सुकून मिलता है.
प्रश्न - महिलाओं में शिक्षा के क्या मायने हैं?
उत्तर - मेरा मानना है कि महिला शिक्षित होगी तो परिवार शिक्षित होगा.
प्रश्न - जिस तरीके से आफिस में महिलायें असुरक्षित महसूस करती है, इसके क्या करण हैं?
उत्तर - यह तो अपने - अपने तरीके हैं, आप जिस माहौल में हैं उसमें आपको कैसे ढलना है इसका निर्णय आपको स्वयं लेना होगा.
प्रश्न - इस फील्ड में आने पर आपको किस - किस से सपोर्ट मिला?
उत्तर - प्रभात रंजन दीन की मैं बहुत आभारी हूँ जिन्होंने हमें सारे काम सीखने के अवसर दिये. वैसे तो और भी लोग हैं जिसमें अरविन्द चतुर्वेदी, देशमुख पवार, राजीव मिश्रा, सुमन श्रीवास्तव इन सभी की मदद के बिना मेरा यहां तक पहुंचना मुश्किल था.
प्रश्न - चलते - चलते आप यह बतायें कि मीडिया के अलावा किस चीज में आपकी रूचि ज्यादा है?
उत्तर - हाँ, मुझे राजनीति बहुत अच्छी लगती है, लोग अगर मौका देंगे तो मैं उनके लिए काम करना पसन्द करूंगी.
सुचित्रा जी से मिलने के बाद यह लगा कि कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि बहुत देर हो चुकी है अगर काम अच्छा है तो कभी भी शुरू कर सकते हैं और अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं और मुश्किलें तो आती रहती है इन सब से खुद निपटना होगा .
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